Skip to main content

भोपाल जिले में रहेगा 10 दिवसीय लॉकडाउन, शासकीय कार्यालय 25 से 30 प्रतिशत क्षमता के साथ खुलेंगे, उचित मूल्य की राशन दुकानें खुली रहेंगी, मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कोरोना की स्थिति एवं व्यवस्थाओं की समीक्षा की

भोपाल जिले में रहेगा 10 दिवसीय लॉकडाउन


शासकीय कार्यालय 25 से 30 प्रतिशत क्षमता के साथ खुलेंगे


उचित मूल्य की राशन दुकानें खुली रहेंगी


मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कोरोना की स्थिति एवं व्यवस्थाओं की समीक्षा की



भोपाल : गुरूवार, जुलाई 23, 2020, 18:57 IST


मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि 24 जुलाई रात्रि 8 बजे से भोपाल जिले की समस्त राजस्व सीमाओं में 10 दिवसीय कंपलीट लॉकडाउन होगा। इस दौरान दवाओ, सब्जी, फल, दूध आदि अतिआवश्यक सेवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। गरीब वर्ग की सुविधा के लिए शासकीय उचित मूल्य की दुकानें खुली रहेंगी। सभी निजी कार्यालय एवं व्यापारिक संस्थान बंद रहेंगे। सभी उद्योग चालू रहेंगे तथा औद्योगिक क्षेत्रों में आने-जाने के लिए फैक्ट्री स्वामी द्वारा अपने कर्मचारियों को जारी किए गए परिचय-पत्र मान्य किए जाएंगे। अति आवश्यक कार्य से भोपाल की सीमाओं के अंदर और बाहर जाने के‍ लिए ई-पास दिए जाएंगे।



मुख्यमंत्री श्री चौहान मंत्रालय में वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश में कोरोना की स्थिति एवं व्यवस्थाओं की समीक्षा कर रहे थे। बैठक में गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र, चिकित्सा शिक्षा, भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास मंत्री श्री विश्वास सारंग, मुख्य सचिव श्री इकबाल सिंह बैंस, अपर मुख्य सचिव गृह श्री एस.एन. मिश्रा, प्रमुख सचिव श्री फैज अहमद किदवई आदि उपस्थित थे। अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य श्री मोहम्मद सुलेमान इंदौर से वी.सी. से शामिल हुए।


कॉन्ट्रेक्ट ट्रेसिंग करें, संक्रमण रोके


अनूपपुर जिले की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कॉन्ट्रेक्ट ट्रेसिंग बढ़ाने तथा संक्रमण रोकने के सभी प्रयास किए जाने के निर्देश दिए। बालाघाट जिले को ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बतरने के लिए कहा गया। छतरपुर जिले के मुख्य चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी को हटाने एवं वहां बेहतर व्यवस्थाएं किए जाने के निर्देश दिए गए।


इन जिलों पर विशेष ध्यान दें


मुख्यमंत्री श्री चौहान ने अधिक संक्रमण वाले जिलों भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, मुरैना, खरगौन पर विशेष ध्यान दिए जाने के निर्देश दिए। उज्जैन में भी अब मरीज बढ़ रहे हैं, वहां भी ध्यान दिया जाए।


मृत्यु दर में उल्लेखनीय गिरावट, इंदौर की केस स्टडी करें


मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि इंदौर में कोरोना संक्रमण पर प्रभावी नियंत्रण एवं मृत्यु दर में उल्लेखनीय गिरावट हुई है। इंदौर में अप्रैल माह में 138, मई में 72, जून में 64 तथा जुलाई में 18 कोरोना मृत्यु हुई हैं। इंदौर की केस स्टडी की जाए तथा वहां की बैस्ट प्रेक्टिसेस को अन्य जिलों में भी लागू करें।


हर कोविड वार्ड में लगाएं सी.सी.टी.वी. कैमरे


मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि कोविड अस्पतालों में इलाज का बैस्ट प्रोटोकॉल फॉलो किया जा रहा है अथवा नहीं, इसकी मॉनीटरिंग के लिए कोविड अस्पतालों में जहां सी.सी.टी.वी. कैमरे नहीं है वहां सी.सी.टी.वी. कैमरे लगाए जाएं।


मेडिकल कॉलेज शहडोल को पूरा तैयार रखा जाए


शहडोल जिले की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री श्री चौहान ने निर्देश दिए कि वहां के मेडिकल कॉलेज को पूर्ण रूप से तैयार रखा जाए, जिससे कि आसपास के कोविड मरीजों का अच्छा इलाज सुनिश्चित किया जा सके। मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने निर्देश दिए कि प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की भर्ती शीघ्र की जाए।






Bkk News


Bekhabaron Ki Khabar - बेख़बरों की खबर


Bekhabaron Ki Khabar, magazine in Hindi by Radheshyam Chourasiya / Bekhabaron Ki Khabar: Read on mobile & tablets - http://www.readwhere.com/publication/6480/Bekhabaron-ki-khabar


 


 


Comments

Popular posts from this blog

आधे अधूरे - मोहन राकेश : पाठ और समीक्षाएँ | मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे : मध्यवर्गीय जीवन के बीच स्त्री पुरुष सम्बन्धों का रूपायन

  आधे अधूरे - मोहन राकेश : पीडीएफ और समीक्षाएँ |  Adhe Adhure - Mohan Rakesh : pdf & Reviews मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे - प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा हिन्दी के बहुमुखी प्रतिभा संपन्न नाट्य लेखक और कथाकार मोहन राकेश का जन्म  8 जनवरी 1925 को अमृतसर, पंजाब में  हुआ। उन्होंने  पंजाब विश्वविद्यालय से हिन्दी और अंग्रेज़ी में एम ए उपाधि अर्जित की थी। उनकी नाट्य त्रयी -  आषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस और आधे-अधूरे भारतीय नाट्य साहित्य की उपलब्धि के रूप में मान्य हैं।   उनके उपन्यास और  कहानियों में एक निरंतर विकास मिलता है, जिससे वे आधुनिक मनुष्य की नियति के निकट से निकटतर आते गए हैं।  उनकी खूबी यह थी कि वे कथा-शिल्प के महारथी थे और उनकी भाषा में गज़ब का सधाव ही नहीं, एक शास्त्रीय अनुशासन भी है। कहानी से लेकर उपन्यास तक उनकी कथा-भूमि शहरी मध्य वर्ग है। कुछ कहानियों में भारत-विभाजन की पीड़ा बहुत सशक्त रूप में अभिव्यक्त हुई है।  मोहन राकेश की कहानियां नई कहानी को एक अपूर्व देन के रूप में स्वीकार की जाती हैं। उनकी कहानियों में आधुनिक जीवन का कोई-न-कोई विशिष्ट पहलू उजागर

हिंदी कथा साहित्य / संपादक प्रो. शैलेंद्र कुमार शर्मा

हिंदी कथा साहित्य की भूमिका और संपादकीय के अंश : किस्से - कहानियों, कथा - गाथाओं के प्रति मनुष्य की रुचि सहस्राब्दियों पूर्व से रही है, लेकिन उपन्यास या नॉवेल और कहानी या शार्ट स्टोरी के रूप में इनका विकास पिछली दो सदियों की महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है। हिंदी में नए रूप में कहानी एवं उपन्यास  विधा का आविर्भाव बीसवीं शताब्दी में हुआ है। वैसे संस्कृत का कथा - साहित्य अखिल विश्व के कथा - साहित्य का जन्मदाता माना जाता है। लोक एवं जनजातीय साहित्य में कथा – वार्ता की सुदीर्घ परम्परा रही है। इधर आधुनिक हिन्दी कथा साहित्य का विकास संस्कृत - कथा - साहित्य अथवा लोक एवं जनजातीय कथाओं की समृद्ध परम्परा से न होकर, पाश्चात्य कथा साहित्य, विशेषतया अंग्रेजी साहित्य के प्रभाव रूप में हुआ है।  कहानी कथा - साहित्य का एक अन्यतम भेद और उपन्यास से अधिक लोकप्रिय साहित्य रूप है। मनुष्य के जन्म के साथ ही साथ कहानी का भी जन्म हुआ और कहानी कहना - सुनना मानव का स्वभाव बन गया। सभी प्रकार के समुदायों में कहानियाँ पाई जाती हैं। हमारे देश में तो कहानियों की सुदीर्घ और समृद्ध परंपरा रही है। वेद - उपनिषदों में वर्णित यम-य

मालवी भाषा और साहित्य : प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा

MALVI BHASHA AUR SAHITYA: PROF. SHAILENDRAKUMAR SHARMA पुस्तक समीक्षा: डॉ श्वेता पंड्या Book Review : Dr. Shweta Pandya  मालवी भाषा एवं साहित्य के इतिहास की नई दिशा  लोक भाषा, लोक साहित्य और संस्कृति का मानव सभ्यता के विकास में अप्रतिम योगदान रहा है। भाषा मानव समुदाय में परस्पर सम्पर्क और अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है। इसी प्रकार क्षेत्र-विशेष की भाषा एवं बोलियों का अपना महत्त्व होता है। भारतीय सभ्यता और संस्कृति से जुड़े विशाल वाङ्मय में मालवा प्रदेश, अपनी मालवी भाषा, साहित्य और संस्कृति के कारण महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है। यहाँ की भाषा एवं लोक-संस्कृति ने  अन्य क्षेत्रों पर प्रभाव डालते हुए अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। मालवी भाषा और साहित्य के विशिष्ट विद्वानों में डॉ. शैलेन्द्रकुमार शर्मा का नाम बड़े आदर से लिया जाता है। प्रो. शर्मा हिन्दी आलोचना के आधुनिक परिदृश्य के विशिष्ट समीक्षकों में से एक हैं, जिन्होंने हिन्दी साहित्य की विविध विधाओं के साथ-साथ मालवी भाषा, लोक एवं शिष्ट साहित्य और संस्कृति की परम्परा को आलोचित - विवेचित करने का महत्त्वपूर्ण एवं सार्थक प्रयास किया है। उनकी साह