Skip to main content

संचेतना समाचार संत कबीरदास विशेषांक का इन्दौर में विमोचन होगा

राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना का मुख पत्र संचेतना समाचार के संत कबीरदास विशेषांक प्रकाशन संत कबीर जयंती पर किया गया। जिसका विमोचन हिन्दी परिवार इन्दौर के राष्ट्रीय समारोह अवसर पर अतिथियों एवं पदाधिकारियो की उपस्थिति में आगामी 12 जून को श्री मध्यभारत हिन्दी साहित्य समिति के शिवाजी भवन इन्दौर में होगा।

यह जानकारी राष्ट्रीय महासचिव एवं सम्पादक डॉ. प्रभु चौधरी ने देते हुए बताया कि संचेतना समाचार पत्र गत वर्ष से प्रारंभ किया गया जिसके प्रवेशांक का विमोचन विँक्रम विश्वविद्यालय कुलपति डॉ. अखिलेश पाण्डेय, कुलानुशासक डॉ. शैलेन्द्रकुमार शर्मा, पूर्व कुलपति डॉ. बालकृष्ण शर्मा, राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री ब्रजकिशोर शर्मा, प्रधान सम्पादक श्री हरेराम वाजपेयी, सम्पादक डॉ. प्रभु चौधरी की उपस्थिति में किया गया। संचेतना समाचार मासिक नियमित प्रकाशित किया जा रहा है। संत कबीरदास विशेषांक को महामहिम राज्यपाल कर्नाटक डॉ. थावरचंद गेहलोत, राष्ट्रीय महामंत्री नागरी लिपि परिषद् नई दिल्ली डॉ. हरिसिंह पाल की बधाई शुभकामनाएं प्राप्त हो रही है। विशेषांक में संत कबीरदासजी पर आलेख, गीत, कविता एवं गत वर्षो के समारोह के समाचार चित्र प्रकाशित हो रहे है।

संचेतना समाचार के विमोचन अवसर पर साहित्यकारो-संस्था पदाधिकारियों से उपस्थिति का अनुरोध राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. जी.डी. अग्रवाल, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष श्री अनिल ओझा, श्रीमती मणिमाला शर्मा, डॉ. निशा जोशी, डॉ. अमृता अवस्थी, सुश्री हेमलता शर्मा, श्री कैलाशचन्द्र परमार, निरूपमा त्रिवेदी, अर्पणा जोशी, करूणा प्रजापति, ज्योति जलज, ऋचा तिवारी, मनोरमा जैन, गरिमा गर्ग, डॉ. रश्मि चौबे, ज्योति चौहान, सविता दुबे, हेमलता तोमर, अर्चना लिबानिया, प्रभा बैरागी, रेखा भवालकर, डॉ. ज्योति सिंह, प्रगति बैरागी, कल्पना शाह, पूजा यादव, पूजा शर्मा आदि ने किया है।

Comments

मध्यप्रदेश खबर

नेशनल न्यूज़

Popular posts from this blog

आधे अधूरे - मोहन राकेश : पाठ और समीक्षाएँ | मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे : मध्यवर्गीय जीवन के बीच स्त्री पुरुष सम्बन्धों का रूपायन

  आधे अधूरे - मोहन राकेश : पीडीएफ और समीक्षाएँ |  Adhe Adhure - Mohan Rakesh : pdf & Reviews मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे - प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा हिन्दी के बहुमुखी प्रतिभा संपन्न नाट्य लेखक और कथाकार मोहन राकेश का जन्म  8 जनवरी 1925 को अमृतसर, पंजाब में  हुआ। उन्होंने  पंजाब विश्वविद्यालय से हिन्दी और अंग्रेज़ी में एम ए उपाधि अर्जित की थी। उनकी नाट्य त्रयी -  आषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस और आधे-अधूरे भारतीय नाट्य साहित्य की उपलब्धि के रूप में मान्य हैं।   उनके उपन्यास और  कहानियों में एक निरंतर विकास मिलता है, जिससे वे आधुनिक मनुष्य की नियति के निकट से निकटतर आते गए हैं।  उनकी खूबी यह थी कि वे कथा-शिल्प के महारथी थे और उनकी भाषा में गज़ब का सधाव ही नहीं, एक शास्त्रीय अनुशासन भी है। कहानी से लेकर उपन्यास तक उनकी कथा-भूमि शहरी मध्य वर्ग है। कुछ कहानियों में भारत-विभाजन की पीड़ा बहुत सशक्त रूप में अभिव्यक्त हुई है।  मोहन राकेश की कहानियां नई कहानी को एक अपूर्व देन के रूप में स्वीकार की जाती हैं। उनकी कहानियों में आधुनिक जीवन का कोई-न-कोई विशिष्ट पहलू उजागर

हिंदी कथा साहित्य / संपादक प्रो. शैलेंद्र कुमार शर्मा

हिंदी कथा साहित्य की भूमिका और संपादकीय के अंश : किस्से - कहानियों, कथा - गाथाओं के प्रति मनुष्य की रुचि सहस्राब्दियों पूर्व से रही है, लेकिन उपन्यास या नॉवेल और कहानी या शार्ट स्टोरी के रूप में इनका विकास पिछली दो सदियों की महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है। हिंदी में नए रूप में कहानी एवं उपन्यास  विधा का आविर्भाव बीसवीं शताब्दी में हुआ है। वैसे संस्कृत का कथा - साहित्य अखिल विश्व के कथा - साहित्य का जन्मदाता माना जाता है। लोक एवं जनजातीय साहित्य में कथा – वार्ता की सुदीर्घ परम्परा रही है। इधर आधुनिक हिन्दी कथा साहित्य का विकास संस्कृत - कथा - साहित्य अथवा लोक एवं जनजातीय कथाओं की समृद्ध परम्परा से न होकर, पाश्चात्य कथा साहित्य, विशेषतया अंग्रेजी साहित्य के प्रभाव रूप में हुआ है।  कहानी कथा - साहित्य का एक अन्यतम भेद और उपन्यास से अधिक लोकप्रिय साहित्य रूप है। मनुष्य के जन्म के साथ ही साथ कहानी का भी जन्म हुआ और कहानी कहना - सुनना मानव का स्वभाव बन गया। सभी प्रकार के समुदायों में कहानियाँ पाई जाती हैं। हमारे देश में तो कहानियों की सुदीर्घ और समृद्ध परंपरा रही है। वेद - उपनिषदों में वर्णित यम-य

कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय को नई शिक्षा नीति का उत्कृष्ट पुरस्कार

  उज्जैन : मध्यप्रदेश में नई शिक्षा नीति का सर्वप्रथम क्रियान्वयन करने पर जबलपुर में आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन के कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय को नई शिक्षा नीति में उत्कृष्ट पुरस्कार से सम्मानित किया गया। एनवायरनमेंट एवं सोशल वेलफेयर सोसाइटी, खजुराहो एवं प्राणीशास्त्र एवं जैवप्रौद्योगिकी विभाग, शासकीय विज्ञान स्नातकोत्तर महाविद्यालय, जबलपुर के संयुक्त तत्वाधान में आयोजन दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन जबलपुर में किया गया। इस अवसर पर मध्य प्रदेश में नई शिक्षा नीति के सर्वप्रथम क्रियान्वयन के लिए विक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय को नई शिक्षानीति में उत्कृष्ट पुरस्कार से सम्मानित किया गया। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय की प्रशासनिक कार्यकुशलता से आज विश्वविद्यालय नई शिक्षा का क्रियान्वयन करने वाला प्रदेश का पहला विश्वविद्यालय है। इस उपलब्धि के लिए विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ प्रशांत पुराणिक एवं कुलानुशासक प्रो शैलेन्द्र कुमार शर्मा ने कुलपति प्रो पांडेय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उन्हें हार्दिक