Skip to main content

कोरोना के निःशुल्क इलाज़ के लिए नई योजना लागू होगी ; मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कोरोना नियंत्रण कोर ग्रुप की बैठक ली

 कोरोना के निःशुल्क इलाज़ के लिए नई योजना लागू होगी

आयुष्मान योजना पर निजी अस्पतालों को दिया जाएगा विशेष पैकेज
सरकार निजी अस्पतालों को कोविड इलाज़ के लिए करेगी अनुबंधित
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कोरोना नियंत्रण कोर ग्रुप की बैठक ली
 

भोपाल : गुरूवार, मई 6, 2021

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि प्रदेश में कोरोना मरीजों के निःशुल्क इलाज़ के लिए नई योजना लागू की जा रही है। इसके अंतर्गत प्रदेश के गरीब एवं आम आदमी को जहां तक मध्यम वर्गीय व्यक्ति को भी कोरोना का निःशुल्क इलाज अनुबंधित निजी अस्पतालों में मिल सकेगा।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि योजना के क्रियान्वयन के लिए आयुष्मान भारत योजना पर निजी अस्पतालों को राज्य सरकार द्वारा विशेष पैकेज दिया जाएगा। सरकार निजी अस्पतालों को कोविड इलाज़ के लिए अनुबंधित करेगी।

मुख्यमंत्री श्री चौहान आज निवास से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कोरोना नियंत्रण कोर ग्रुप की बैठक ले रहे थे। बैठक में संबंधित मंत्री और अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से उपस्थिति हुए।

सीटी स्केन, ऑक्सीजन, दवाओं, इंजेक्शन आदि की निःशुल्क व्यवस्था

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि योजना के अंतर्गत सीटी स्केन आदि जाँचें भी नि:शुल्क होंगी तथा दवाएँ, रेमडेसिविर इंजेक्शन, ऑक्सीजन आदि भी निःशुल्क मिलेंगे।

88 प्रतिशत जनसंख्या कवर्ड

प्रदेश में अभी तक आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत 2 करोड़ 42 लाख कार्ड बनाए गए हैं, जिससे 88 प्रतिशत जनसंख्या कवर्ड हो रही है। इन सभी को शासन द्वारा अनुबंधित अस्पतालों में कोरोना का निःशुल्क इलाज़ मिल सकेगा। प्रदेश में वर्तमान में आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत 328 निजी चिकित्सालय संबद्ध हैं, जिनमें 23 हजार 946 बेड्स उपलब्ध हैं। सरकार द्वारा 5 मई को आयुष्मान भारत योजना अंतर्गत प्रदेश के 68 निजी चिकित्सालयों को अगले 3 महीने के लिये संबद्ध किया गया है।

कलेक्टर कर सकेंगे निजी अस्पतालों को संबद्ध

प्रत्येक जिले के निजी अस्पतालों में नि:शुल्क इलाज मिल सके, इसके लिये कलेक्टर्स को अधिकार दिये गये हैं कि वे अपने जिले के निजी अस्पतालों को आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत अस्थाई रूप से संबद्ध कर सकेंगे। इससे इन सभी निजी अस्पतालों में, जहाँ वर्तमान में कोरोना का इलाज किया जा रहा है, आयुष्मान कार्ड धारियों को कोरोना का नि:शुल्क इलाज मिल सकेगा।

यदि एक सदस्य का कार्ड है, तो अन्य को भी मिलेगी सुविधा

सरकार ने निर्णय लिया है कि आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत यदि परिवार के एक सदस्य के पास आयुष्मान कार्ड है, तो परिवार के अन्य सदस्यों को भी नि:शुल्क उपचार की सुविधा मिल सकेगी। कोविड इलाज के लिये अस्पताल में भर्ती होने पर कलेक्टर उसका आयुष्मान कार्ड बनवाने की व्यवस्था करेंगे।

पैकेज की दरें 40 प्रतिशत बढ़ाईं

निजी अस्पताल कोविड का इलाज इस योजना के अंतर्गत अच्छे तरीके से कर सकें, इसके लिये सरकार द्वारा आयुष्मान भारत पैकेज की दरों को 40 प्रतिशत बढ़ाया गया है। इन दरों में रूम रेंट, भोजन, जाँचें, परामर्श शुल्क, पैरामेडिकल शुल्क आदि सभी सम्मिलित हैं।

5 हजार रुपये डॉयग्नोस्टिक एडवांस

राज्य सरकार द्वारा योजना के अंतर्गत इलाज करवाने वाले प्रत्येक व्यक्ति को एडवांस डॉयग्नोस्टिक के लिये 5 हजार रुपये दिये जायेंगे। आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत 5 हजार रुपये प्रत्येक पात्र परिवार को दिये जाते हैं।

60 हजार बिस्तर हो सकेंगे इलाज के लिये उपलब्ध

इस योजना के लागू हो जाने पर प्रदेश में आयुष्मान भारत योजना के हितग्राहियों को कोविड के इलाज के लिये निजी एवं शासकीय अस्पतालों में कुल 60 हजार 915 बिस्तर उपलब्ध हो सकेंगे। इनमें 37 हजार 159 बिस्तर शासकीय अस्पतालों में, 3 हजार 675 बिस्तर अनुबंधित अस्पतालों में तथा 20 हजार 81 बिस्तर आयुष्मान भारत के अंतर्गत अनुबंधित निजी अस्पतालों में मिल सकेंगे।

युवाओं का वैक्सीनेशन जारी रहे

बैठक में मुख्यमंत्री श्री चौहान ने निर्देश दिए कि वैक्सीन की उपलब्धता अनुसार 18 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों का वैक्सीनेशन निरंतर चलता रहे। इसके साथ ही 45 वर्ष से अधिक के व्यक्तियों का वैक्सीनेशन भी पूर्व अनुसार जारी रहे।

डिस्चार्ज अधिक होने से बिस्तरों की उपलब्धता बढ़ी है

जिलेवार समीक्षा में पाया गया कि ज़िलों में अस्पतालों से कोरोना के मरीज़ बड़ी संख्या में स्वस्थ होकर डिस्चार्ज हो रहे हैं, जिससे बिस्तरों की उपलब्धता बढ़ी है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने आई.सी.यू. बेड्स बढ़ाए जाने के निर्देश दिए।

Comments

मध्यप्रदेश समाचार

देश समाचार

Popular posts from this blog

आधे अधूरे - मोहन राकेश : पाठ और समीक्षाएँ | मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे : मध्यवर्गीय जीवन के बीच स्त्री पुरुष सम्बन्धों का रूपायन

  आधे अधूरे - मोहन राकेश : पीडीएफ और समीक्षाएँ |  Adhe Adhure - Mohan Rakesh : pdf & Reviews मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे - प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा हिन्दी के बहुमुखी प्रतिभा संपन्न नाट्य लेखक और कथाकार मोहन राकेश का जन्म  8 जनवरी 1925 को अमृतसर, पंजाब में  हुआ। उन्होंने  पंजाब विश्वविद्यालय से हिन्दी और अंग्रेज़ी में एम ए उपाधि अर्जित की थी। उनकी नाट्य त्रयी -  आषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस और आधे-अधूरे भारतीय नाट्य साहित्य की उपलब्धि के रूप में मान्य हैं।   उनके उपन्यास और  कहानियों में एक निरंतर विकास मिलता है, जिससे वे आधुनिक मनुष्य की नियति के निकट से निकटतर आते गए हैं।  उनकी खूबी यह थी कि वे कथा-शिल्प के महारथी थे और उनकी भाषा में गज़ब का सधाव ही नहीं, एक शास्त्रीय अनुशासन भी है। कहानी से लेकर उपन्यास तक उनकी कथा-भूमि शहरी मध्य वर्ग है। कुछ कहानियों में भारत-विभाजन की पीड़ा बहुत सशक्त रूप में अभिव्यक्त हुई है।  मोहन राकेश की कहानियां नई कहानी को एक अपूर्व देन के रूप में स्वीकार की जाती हैं। उनकी कहानियों में आधुनिक जीवन का कोई-न-कोई विशिष्

तृतीय पुण्य स्मरण... सादर प्रणाम ।

https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=1003309866744766&id=395226780886414 Bekhabaron Ki Khabar - बेख़बरों की खबर Bekhabaron Ki Khabar - बेख़बरों की खबर Bkk News Bekhabaron Ki Khabar, magazine in Hindi by Radheshyam Chourasiya / Bekhabaron Ki Khabar: Read on mobile & tablets -  http://www.readwhere.com/publication/6480/Bekhabaron-ki-khabar

चौऋषिया दिवस (नागपंचमी) पर चौऋषिया समाज विशेष, नाग पंचमी और चौऋषिया दिवस की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं

चौऋषिया शब्द की उत्पत्ति और अर्थ: श्रावण मास में आने वा ली नागपंचमी को चौऋषिया दिवस के रूप में पुरे भारतवर्ष में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता हैं। चौऋषिया शब्द की उत्पत्ति संस्कृत शब्द "चतुरशीतिः" से हुई हैं जिसका शाब्दिक अर्थ "चौरासी" होता हैं अर्थात चौऋषिया समाज चौरासी गोत्र से मिलकर बना एक जातीय समूह है। वास्तविकता में चौऋषिया, तम्बोली समाज की एक उपजाति हैं। तम्बोली शब्द की उत्पति संस्कृत शब्द "ताम्बुल" से हुई हैं जिसका अर्थ "पान" होता हैं। चौऋषिया समाज के लोगो द्वारा नागदेव को अपना कुलदेव माना जाता हैं तथा चौऋषिया समाज के लोगो को नागवंशी भी कहा जाता हैं। नागपंचमी के दिन चौऋषिया समाज द्वारा ही नागदेव की पूजा करना प्रारम्भ किया गया था तत्पश्चात सम्पूर्ण भारत में नागपंचमी पर नागदेव की पूजा की जाने लगी। नागदेव द्वारा चूहों से नागबेल (जिस पर पान उगता हैं) कि रक्षा की जाती हैं।चूहे नागबेल को खाकर नष्ट करते हैं। इस नागबेल (पान)से ही समाज के लोगो का रोजगार मिलता हैं।पान का व्यवसाय चौरसिया समाज के लोगो का मुख्य व्यवसाय हैं।इस हेतू समाज के लोगो ने अपने