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भारतीय संस्कृति का महत्व राष्ट्रीय शिक्षा नीति में निहित है- डॉ. शेख




राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना के 82 वें वेबीनार राष्ट्रीय संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. शहाबुद्दीन शेख(पुणे) ने अपने अध्यक्षीय भाषण में बताया कि देश की प्रगति भारतीय भाषाओं के सहयोग से हो रही है। श्री राकेश छोकर को बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए संचेतना में सहयोग का अनुरोध किया।

इस संगोष्ठी में सरस्वती वंदना डॉ.  रश्मि चौबे ने एवं अतिथि परिचय डॉ. प्रभु चौधरी ने तथा स्वागत भाषण श्रीमती अनुराधा अच्छावन ने दिया। महासचिव प्रदेश छत्तीसगढ़ पूर्णिमा कौशिक ने स्लाईड प्रोजेक्ट का प्रसारण किया। विशिष्ट अतिथि श्री मोहनलाल वर्मा ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति में बताया कि शिक्षा नीति में भारतीय संस्कृति को आगे बढ़ाया जावे। संस्कृति की जननी है हिन्दी भाषा। जो विश्व में प्रथम स्थान प्राप्त करेगी। 

शिक्षक संचेतना के मार्गदर्शन में विशिष्ट अतिथि श्री हरेराम वाजपेयी एवं पत्रकार श्री राकेशकुमार आर्य संस्कृतमय वक्तव्य एवं कविता के माध्यम से शुभकामनाएँ प्रदान की। नागरी लिपि परिषद् नई दिल्ली के महामंत्री डॉ. हरिसिंह पाल एवं श्रीमती सुवर्णा जाधव ने बधाई देते हुए शिक्षक संचेतना को सहयोग का अनुरोध किया। 

आस्लो नार्वे के हिन्दी सेवी श्री सुरेशचन्द्र शुक्ल एवं श्री ब्रजकिशोर शर्मा ने बधाई के साथ शिक्षा नीति की सफलता के लिये शुभकामनाएँ दी। राष्ट्रीय महासचिव डॉ. प्रभु चौधरी ने भारतीय संस्कृति में शिक्षा को महत्वपूर्ण बताते हुए संस्कृत वेदभाषा की बड़ी बेटी हिन्दी एवं समस्त भारतीय भाषाएँ है। नई शिक्षा नीति में देश के सभी लोगों के लिये अवसर प्रदान होंगे। समारोह में डॉ. शिवा लोहारिया, जितेन्द्र पंड्या, रोहिणी डावरे, अनुराधा अच्छवान आदि ने भी बधाई देते हुए विचार व्यक्त किये।

संगोष्ठी का सफल संचालन कवयित्री पूर्णिमा कौशिक ने एवं राष्ट्रीय महासचिव इकाई महिला गरिमा गर्ग ने काव्यमय आभार माना।

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