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धीरज एवं धर्म की परीक्षा 


धीरज धर्म मित्र अरु नारी। 
आपद काल परिखि अहिं चारी।। 


        रामायण में गोस्वामी तुलसी दास का यह वाक्य आज के परिपेक्ष्य में कितना सटीक है कि विपत्ति के समय ही धीरज (धैर्य) एवं धर्म(कर्तव्य) आदि की परीक्षा होती है।
                     पूरा देश बहुत ही धीरज (धैर्य) के साथ लाक डाउन का पालन कर रहा है और डॉक्टर्स, नर्सिंग स्टाफ, पुलिस कर्मी, अधिकारी कर्मचारी एवं समाज सेवी संस्थाऐं  सभी देवदूत बनकर अपनी जान की परवाह न करते हुऐ अपना धर्म (कर्तव्य) निभा रहे हैं। 
         इसके विपरीत कुछ लोगों ने ऐसा धर्म (अधर्म) अपनाया हुआ है कि "हम तो डूबेंगे तुम्हें भी ले डूबेंगे सनम" को चरित्रार्थ करते हुए सेवा में लगे डॉक्टर्स एवं पुलिस कर्मियों आदि पर पत्थर बाजी एवं दुर्व्यवहार करते हैं। इन्हीं लोगों के कारण केंद्र सरकार को महामारी कानून में संशोधन कर अध्यादेशजारी करना पड़ा।
        कृपया लाक डाउन का पालन, एवं इन  देवदूतो  का सम्मान करें।


डॉ. राम अरोरा 
एम.डी.(आयुर्वेद)
उज्जैन म.प्र.


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